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इस मॉड्यूल के पाठ

लुङ् लकार — Aorist

अनुमानित समय: 20 मिनट

लुङ् लकार — सामान्य भूतकाल (Aorist)

लुङ् लकार संस्कृत का सामान्य भूतकाल (Aorist) है। यह बताता है कि कोई कार्य भूतकाल में हुआ — बिना यह बताए कि कब, कितनी देर पहले, या उसका प्रभाव अभी तक है या नहीं।

लुङ् और अन्य भूतकाल लकारों की तुलना

लकारनामविशेषता
लङ्अनद्यतन भूतआज से पहले (imperfect)
लुङ्सामान्य भूतअनिश्चित भूत (aorist)
लिट्परोक्ष भूतदूर का भूत, अदृष्ट (perfect)

अ-augment (अट् आगम)

लुङ् लकार में (लङ् की तरह) धातु के पूर्व ‘अ’ जोड़ा जाता है:

+ धातु + प्रत्यय

जैसे: + भू + त् = अभूत् (हुआ)

लुङ् लकार के तीन प्रकार

1. सरल/अजन्त लुङ् (Root Aorist)

सबसे सरल — अ + धातु + प्रत्यय:

भू धातु — सरल लुङ्:

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअभूत्अभूताम्अभूवन्
मध्यमअभूःअभूतम्अभूत
उत्तमअभूवम्अभूवअभूम

दा धातु — सरल लुङ्:

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअदात्अदाताम्अदुः
मध्यमअदाःअदातम्अदात
उत्तमअदाम्अदावअदाम

2. सिच् लुङ् (Sibilant Aorist)

धातु और प्रत्यय के बीच स् (सिच्) लगता है:

अ + धातु + स् + प्रत्यय

कृ धातु — सिच् लुङ्:

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअकार्षीत्अकार्ष्टाम्अकार्षुः
मध्यमअकार्षीःअकार्ष्टम्अकार्ष्ट
उत्तमअकार्षम्अकार्ष्वअकार्ष्म

नी धातु — सिच् लुङ्:

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअनैषीत्अनैष्टाम्अनैषुः

3. अभ्यस्त लुङ् (Reduplicating Aorist)

धातु का द्वित्व (reduplication) होता है:

अ + द्वित्व + धातु + प्रत्यय

धातुअभ्यस्त लुङ् (प्र.पु.ए.)अर्थ
गण्अजीगणत्गिना
पत्अपीपतत्गिरा

अभ्यस्त लुङ् अत्यन्त दुर्लभ है — केवल कुछ धातुओं में मिलता है।

सामान्य रूप — जो अधिक मिलते हैं

व्यावहारिक संस्कृत और साहित्य में इन लुङ् रूपों को सबसे अधिक देखेंगे:

धातुलुङ् (प्र.पु.ए.)अर्थ
भूअभूत्हुआ
कृअकार्षीत्किया
गम्अगमत्गया
दाअदात्दिया
स्थाअस्थात्ठहरा
वच्अवोचत्बोला
दृश्अद्राक्षीत्देखा

लुङ् लकार का प्रयोग

लुङ् लकार इन स्थितियों में मिलता है:

  1. ‘मा’ (न) के साथ निषेध — मा गमः (मत जाओ!) — लुङ् + मा = निषेध (prohibition)
  2. सामान्य भूत कथन — किम् अभूत्? (क्या हुआ?)
  3. कथा-वर्णन — सः अगमत् (वह गया)

विशेष: ‘मा’ + लुङ् = निषेध — यह लुङ् का सबसे सामान्य प्रयोग है: मा भूत् (ऐसा न हो), मा गमः (मत जा)।

याद रखें

  1. लुङ् = Aorist = सामान्य भूतकाल
  2. अ-augment + धातु + प्रत्यय — तीन प्रकार (सरल, सिच्, अभ्यस्त)
  3. सबसे महत्त्वपूर्ण प्रयोग: मा + लुङ् = निषेध (मा भूत्, मा गमः)
  4. अभूत्, अकार्षीत्, अगमत् — ये सबसे सामान्य लुङ् रूप हैं
  5. कठिन लुङ् रूपों को रटने की आवश्यकता नहीं — पहचानना महत्त्वपूर्ण है

अभ्यास

प्रश्न 1 / 70 सही

लुङ् लकार किस काल को दर्शाता है?