लुङ् लकार — Aorist
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लुङ् लकार — सामान्य भूतकाल (Aorist)
लुङ् लकार संस्कृत का सामान्य भूतकाल (Aorist) है। यह बताता है कि कोई कार्य भूतकाल में हुआ — बिना यह बताए कि कब, कितनी देर पहले, या उसका प्रभाव अभी तक है या नहीं।
लुङ् और अन्य भूतकाल लकारों की तुलना
| लकार | नाम | विशेषता |
|---|---|---|
| लङ् | अनद्यतन भूत | आज से पहले (imperfect) |
| लुङ् | सामान्य भूत | अनिश्चित भूत (aorist) |
| लिट् | परोक्ष भूत | दूर का भूत, अदृष्ट (perfect) |
अ-augment (अट् आगम)
लुङ् लकार में (लङ् की तरह) धातु के पूर्व ‘अ’ जोड़ा जाता है:
अ + धातु + प्रत्यय
जैसे: अ + भू + त् = अभूत् (हुआ)
लुङ् लकार के तीन प्रकार
1. सरल/अजन्त लुङ् (Root Aorist)
सबसे सरल — अ + धातु + प्रत्यय:
भू धातु — सरल लुङ्:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अभूत् | अभूताम् | अभूवन् |
| मध्यम | अभूः | अभूतम् | अभूत |
| उत्तम | अभूवम् | अभूव | अभूम |
दा धातु — सरल लुङ्:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अदात् | अदाताम् | अदुः |
| मध्यम | अदाः | अदातम् | अदात |
| उत्तम | अदाम् | अदाव | अदाम |
2. सिच् लुङ् (Sibilant Aorist)
धातु और प्रत्यय के बीच स् (सिच्) लगता है:
अ + धातु + स् + प्रत्यय
कृ धातु — सिच् लुङ्:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अकार्षीत् | अकार्ष्टाम् | अकार्षुः |
| मध्यम | अकार्षीः | अकार्ष्टम् | अकार्ष्ट |
| उत्तम | अकार्षम् | अकार्ष्व | अकार्ष्म |
नी धातु — सिच् लुङ्:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अनैषीत् | अनैष्टाम् | अनैषुः |
3. अभ्यस्त लुङ् (Reduplicating Aorist)
धातु का द्वित्व (reduplication) होता है:
अ + द्वित्व + धातु + प्रत्यय
| धातु | अभ्यस्त लुङ् (प्र.पु.ए.) | अर्थ |
|---|---|---|
| गण् | अजीगणत् | गिना |
| पत् | अपीपतत् | गिरा |
अभ्यस्त लुङ् अत्यन्त दुर्लभ है — केवल कुछ धातुओं में मिलता है।
सामान्य रूप — जो अधिक मिलते हैं
व्यावहारिक संस्कृत और साहित्य में इन लुङ् रूपों को सबसे अधिक देखेंगे:
| धातु | लुङ् (प्र.पु.ए.) | अर्थ |
|---|---|---|
| भू | अभूत् | हुआ |
| कृ | अकार्षीत् | किया |
| गम् | अगमत् | गया |
| दा | अदात् | दिया |
| स्था | अस्थात् | ठहरा |
| वच् | अवोचत् | बोला |
| दृश् | अद्राक्षीत् | देखा |
लुङ् लकार का प्रयोग
लुङ् लकार इन स्थितियों में मिलता है:
- ‘मा’ (न) के साथ निषेध — मा गमः (मत जाओ!) — लुङ् + मा = निषेध (prohibition)
- सामान्य भूत कथन — किम् अभूत्? (क्या हुआ?)
- कथा-वर्णन — सः अगमत् (वह गया)
विशेष: ‘मा’ + लुङ् = निषेध — यह लुङ् का सबसे सामान्य प्रयोग है: मा भूत् (ऐसा न हो), मा गमः (मत जा)।
याद रखें
- लुङ् = Aorist = सामान्य भूतकाल
- अ-augment + धातु + प्रत्यय — तीन प्रकार (सरल, सिच्, अभ्यस्त)
- सबसे महत्त्वपूर्ण प्रयोग: मा + लुङ् = निषेध (मा भूत्, मा गमः)
- अभूत्, अकार्षीत्, अगमत् — ये सबसे सामान्य लुङ् रूप हैं
- कठिन लुङ् रूपों को रटने की आवश्यकता नहीं — पहचानना महत्त्वपूर्ण है
अभ्यास
लुङ् लकार किस काल को दर्शाता है?