द्विगु समास
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द्विगु समास क्या है?
द्विगु समास कर्मधारय का ही एक उपभेद है। इसमें पूर्वपद संख्यावाचक (numeral) होता है और समस्त पद किसी समूह या समाहार (collection) का बोध कराता है।
पञ्चानां वटानां समाहारः → पञ्चवटी (पाँच वट वृक्षों का समूह → पंचवटी)
मुख्य नियम
- पूर्वपद सदैव संख्यावाचक — द्वि, त्रि, चतुर्, पञ्च, षट्, सप्त, अष्ट, नव, दश आदि
- समस्त पद समूह/समाहार का अर्थ देता है
- समस्त पद प्रायः नपुंसकलिंग (एकवचन) या स्त्रीलिंग में होता है
उदाहरण तालिका
| समस्त पद | संख्या | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|---|
| त्रिलोकी | त्रि (3) | त्रयाणां लोकानां समाहारः | तीन लोकों का समूह |
| त्रिभुवनम् | त्रि (3) | त्रयाणां भुवनानां समाहारः | तीन भुवन |
| चतुर्युगम् | चतुर् (4) | चतुर्णां युगानां समाहारः | चार युगों का समूह |
| पञ्चवटी | पञ्च (5) | पञ्चानां वटानां समाहारः | पाँच वट वृक्षों का समूह |
| पञ्चतन्त्रम् | पञ्च (5) | पञ्चानां तन्त्राणां समाहारः | पाँच तन्त्रों का संग्रह |
| सप्तर्षिः | सप्त (7) | सप्तानां ऋषीणां समाहारः | सात ऋषियों का समूह |
| सप्ताहः | सप्त (7) | सप्तानाम् अह्नां समाहारः | सात दिनों का समूह |
| अष्टाध्यायी | अष्ट (8) | अष्टानाम् अध्यायानां समाहारः | आठ अध्यायों का ग्रन्थ |
| नवरत्नम् | नव (9) | नवानां रत्नानां समाहारः | नौ रत्नों का समूह |
| दशग्रन्थी | दश (10) | दशानां ग्रन्थीनां समाहारः | दस ग्रन्थों का समूह |
लिंग-निर्णय
| लिंग | स्थिति | उदाहरण |
|---|---|---|
| नपुंसकलिंग | सामान्यतः | त्रिभुवनम्, नवरत्नम्, पञ्चतन्त्रम् |
| स्त्रीलिंग | -ई प्रत्यय लगने पर | त्रिलोकी, पञ्चवटी, अष्टाध्यायी |
’द्विगु’ नाम की व्युत्पत्ति
‘द्विगु’ शब्द स्वयं एक द्विगु समास का उदाहरण है:
द्विगु = द्वौ गावौ यस्य मूल्यम् (जिसका मूल्य दो गाय हो)
हालाँकि यह बहुव्रीहि के समान दिखता है, पारम्परिक व्याकरण में ‘द्विगु’ संज्ञा संख्यापूर्वक समास के लिए प्रयुक्त होती है।
कर्मधारय और द्विगु में अन्तर
| कर्मधारय | द्विगु |
|---|---|
| पूर्वपद विशेषण | पूर्वपद संख्या |
| नीलकमलम् (नीला कमल) | त्रिलोकी (तीन लोक) |
| अर्थ: गुण + वस्तु | अर्थ: संख्या + समूह |
वाक्यों में प्रयोग
त्रिलोकी नाथः विष्णुः। तीन लोकों का स्वामी विष्णु है।
पञ्चवट्याम् रामः वसति स्म। पंचवटी में राम रहते थे।
अष्टाध्याय्याम् पाणिनिः संस्कृतव्याकरणं लिखितवान्। अष्टाध्यायी में पाणिनि ने संस्कृत व्याकरण लिखा।
राज्ञः नवरत्नं प्रसिद्धम् आसीत्। राजा के नवरत्न प्रसिद्ध थे।
याद रखें
- द्विगु = संख्या + संज्ञा → समूह/समाहार का बोध
- पूर्वपद सदैव संख्यावाचक (द्वि, त्रि, पञ्च, सप्त, नव आदि)
- समस्त पद प्रायः नपुंसकलिंग (-म्) या स्त्रीलिंग (-ई) में
- विग्रह में ‘समाहारः’ (समूह) शब्द आता है
अभ्यास
द्विगु समास में पूर्वपद क्या होता है?