शतृ और शानच् — वर्तमान कृदन्त
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शतृ और शानच् — वर्तमान कृदन्त
वर्तमान कृदन्त (present participle) बताता है कि कर्ता अभी कर रहा है — “करता हुआ”, “जाता हुआ”।
शतृ प्रत्यय (परस्मैपद — Active)
नियम
- परस्मैपद धातुओं में लगता है
- धातु का लट् लकार (वर्तमान) का अंश + अत्/अन् प्रत्यय
रूप
| धातु | लट् (प्र.पु.ए.) | शतृ (पुल्लिंग) | स्त्रीलिंग | नपुंसकलिंग |
|---|---|---|---|---|
| गम् | गच्छति | गच्छन् | गच्छन्ती | गच्छत् |
| पठ् | पठति | पठन् | पठन्ती | पठत् |
| कृ | करोति | कुर्वन् | कुर्वन्ती | कुर्वत् |
| भू | भवति | भवन् | भवन्ती | भवत् |
| खाद् | खादति | खादन् | खादन्ती | खादत् |
| वद् | वदति | वदन् | वदन्ती | वदत् |
| हस् | हसति | हसन् | हसन्ती | हसत् |
शतृ कृदन्त का विभक्ति-रूप (गच्छत् — पुल्लिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | गच्छन् | गच्छन्तौ | गच्छन्तः |
| द्वितीया | गच्छन्तम् | गच्छन्तौ | गच्छतः |
| तृतीया | गच्छता | गच्छद्भ्याम् | गच्छद्भिः |
| षष्ठी | गच्छतः | गच्छतोः | गच्छताम् |
शतृ कृदन्त विशेषण की तरह काम करता है — जिस संज्ञा को विशेषित करे उसी के लिंग-वचन-विभक्ति में रहता है।
शानच् प्रत्यय (आत्मनेपद — Middle)
नियम
- आत्मनेपद धातुओं में लगता है
- रूप: धातु + मान (-मानः/-माना/-मानम्)
रूप
| धातु | शानच् (पुल्लिंग) | स्त्रीलिंग | अर्थ |
|---|---|---|---|
| सेव् | सेवमानः | सेवमाना | सेवा करता/करती हुआ |
| लभ् | लभमानः | लभमाना | प्राप्त करता/करती हुआ |
| मन् | मन्यमानः | मन्यमाना | सोचता/सोचती हुआ |
| वर्ध् | वर्धमानः | वर्धमाना | बढ़ता/बढ़ती हुआ |
| याच् | याचमानः | याचमाना | माँगता/माँगती हुआ |
शानच् कृदन्त भी विशेषण की तरह decline होता है — अ-कारान्त पुल्लिंग (रामवत्) की भाँति।
वाक्यों में प्रयोग
शतृ कृदन्त
गच्छन् बालकः पतति। जाता हुआ बालक गिरता है।
पठन्तं छात्रं गुरुः पश्यति। पढ़ते हुए छात्र को गुरु देखता है।
हसन्ती बालिका सुन्दरा अस्ति। हँसती हुई बालिका सुन्दर है।
कुर्वन्तः जनाः सुखं लभन्ते। कर्म करते हुए लोग सुख पाते हैं।
शानच् कृदन्त
सेवमानः भक्तः फलं लभते। सेवा करता हुआ भक्त फल पाता है।
वर्धमानः वृक्षः शोभते। बढ़ता हुआ वृक्ष शोभित है।
शतृ और शानच् में अन्तर
| विषय | शतृ | शानच् |
|---|---|---|
| पद | परस्मैपद | आत्मनेपद |
| रूप | -न्/-न्ती/-त् | -मानः/-माना/-मानम् |
| उदाहरण | गच्छन् | सेवमानः |
| विभक्ति | -त् प्रातिपदिक | -अ प्रातिपदिक |
याद रखें
- शतृ = परस्मैपद (गच्छन्, पठन्, कुर्वन्)
- शानच् = आत्मनेपद (सेवमानः, लभमानः)
- दोनों विशेषण की तरह काम करते हैं — संज्ञा के लिंग-वचन-विभक्ति में
- शतृ: पुल्लिंग -न्, स्त्रीलिंग -न्ती, नपुंसकलिंग -त्
- शानच्: -मानः (पुल्लिंग), -माना (स्त्रीलिंग), -मानम् (नपुंसकलिंग)
अभ्यास
प्रश्न 1 / 70 सही
शतृ प्रत्यय किस पद की धातुओं में लगता है?