शर्तवाचक — यदि...तर्हि
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शर्तवाचक वाक्य — यदि…तर्हि
शर्तवाचक (conditional) वाक्य “यदि…तो…” (if…then…) की संरचना रखते हैं।
मूल संरचना
यदि [शर्त], तर्हि [फल]। (if [condition], then [result].)
शर्तवाचक शब्द
| शर्त (if) | फल (then) |
|---|---|
| यदि | तर्हि / तदा / ततः |
| चेत् | तर्हि / (कोई नहीं) |
तीन प्रकार की शर्तें
1. वास्तविक शर्त (Real/Open Condition) — लट् लकार
जो शर्त सत्य हो सकती है — सामान्य/तथ्यात्मक कथन:
यदि सः पठति, तर्हि सः जानाति।
अनुवाद: यदि वह पढ़ता है, तो वह जानता है।
| उदाहरण | अनुवाद |
|---|---|
| यदि वर्षा भवति तर्हि शस्यानि वर्धन्ते | यदि वर्षा होती है तो फसलें बढ़ती हैं |
| यदि त्वं गच्छसि तर्हि अहम् अपि गच्छामि | यदि तू जाता है तो मैं भी जाता हूँ |
2. सम्भावित/काल्पनिक शर्त (Hypothetical) — विधिलिङ्
जो शर्त हो सकती है — कल्पना/सम्भावना:
यदि सः पठेत्, तर्हि उत्तीर्णः भवेत्।
अनुवाद: यदि वह पढ़े, तो उत्तीर्ण हो (जाए)।
| उदाहरण | अनुवाद |
|---|---|
| यदि धनं लभेत तर्हि सुखी भवेत् | यदि धन मिले तो सुखी हो जाए |
| यदि त्वं वदेः तर्हि अहं श्रुणुयाम् | यदि तू बोले तो मैं सुनूँ |
3. अपूर्ण शर्त (Unfulfilled/Counterfactual) — लृङ् लकार
जो शर्त पूरी नहीं हुई — “होता तो… पर हुआ नहीं”:
यदि सः अपठिष्यत्, तर्हि उत्तीर्णः अभविष्यत्।
अनुवाद: यदि वह पढ़ता (पर पढ़ा नहीं), तो उत्तीर्ण होता (पर हुआ नहीं)।
| उदाहरण | अनुवाद |
|---|---|
| यदि रामः अगमिष्यत् तर्हि सीता अपि अगमिष्यत् | यदि राम गया होता तो सीता भी गई होती |
लृङ् लकार दुर्लभ है — व्यावहारिक संस्कृत में विधिलिङ् से ही काम चलाया जाता है।
चेत् — यदि का वैकल्पिक रूप
चेत् = यदि (if), लेकिन दूसरे स्थान पर आता है:
यदि सः पठति → सः चेत् पठति (दोनों समान)
| ‘यदि’ से | ’चेत्’ से |
|---|---|
| यदि त्वं गच्छसि | त्वं चेत् गच्छसि |
| यदि धर्मः अस्ति | धर्मः चेत् अस्ति |
यद्यपि…तथापि — Concessive (यद्यपि…फिर भी)
यह शर्त नहीं, रियायत (concession) है — “भले ही…फिर भी”:
यद्यपि सः दरिद्रः, तथापि सन्तुष्टः।
अनुवाद: भले ही वह गरीब है, फिर भी सन्तुष्ट है।
| उदाहरण | अनुवाद |
|---|---|
| यद्यपि कठिनम् तथापि कर्तव्यम् | भले ही कठिन है फिर भी करना चाहिए |
| यद्यपि सः बालकः तथापि बुद्धिमान् | भले ही वह बालक है फिर भी बुद्धिमान् है |
साहित्यिक उदाहरण
यदि मां निहतं सङ्ख्ये… तस्माद् युध्यस्व भारत। (गीता सन्दर्भ)
विनाशकाले विपरीतबुद्धिः — यदि विनाश का काल आ जाए तो बुद्धि विपरीत हो जाती है।
याद रखें
- यदि…तर्हि = if…then — संस्कृत का मूल conditional
- तीन प्रकार: वास्तविक (लट्), सम्भावित (विधिलिङ्), अपूर्ण (लृङ्)
- चेत् = यदि का विकल्प — दूसरे स्थान पर
- यद्यपि…तथापि = although…still (concessive, शर्त नहीं)
- व्यवहार में विधिलिङ् सबसे अधिक प्रयुक्त — लृङ् दुर्लभ
अभ्यास
'यदि सः पठेत् तर्हि सः उत्तीर्णः भवेत्' — यह कौन-सी शर्त है?