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इस मॉड्यूल के पाठ

घञ्, अप् — भाववाचक कृदन्त

अनुमानित समय: 15 मिनट

घञ् और अप् — भाववाचक कृदन्त

घञ् और अप् प्रत्यय धातु से भाववाचक संज्ञा (abstract nouns) बनाते हैं — जो क्रिया के भाव (the act/process) को सूचित करती हैं।

त्यज् (छोड़ना) + घञ्त्यागः (त्यागने की क्रिया / renunciation)

1. घञ् प्रत्यय

मुख्य नियम

  1. धातु + घञ् = भाववाचक संज्ञा
  2. धातु के मूल स्वर में वृद्धि होती है
  3. परिणामी शब्द प्रायः पुल्लिंग होता है

वृद्धि का नियम

मूल स्वरवृद्धिउदाहरण
त्यज् → त्यागः
युज् → योगः, भुज् → भोगः
आर्

उदाहरण तालिका

धातुअर्थघञ् रूपअर्थ (संज्ञा)
त्यज्छोड़नात्यागःत्याग
युज्जोड़नायोगःयोग / जोड़
भुज्भोगनाभोगःभोग / उपभोग
रञ्ज्रंगना / प्रसन्न होनारागःराग / आसक्ति
विद्जाननावेदःवेद / ज्ञान
क्रुध्क्रोधित होनाक्रोधःक्रोध
लुभ्लोभ करनालोभःलोभ
शुच्शोक करनाशोकःशोक
मुह्मोहित होनामोहःमोह
दुह्दुहनादोहःदोहन

2. अप् प्रत्यय

अप् प्रत्यय भी भाववाचक संज्ञा बनाता है, घञ् के समान:

धातुअर्थअप् रूपअर्थ
जन्उत्पन्न होनाजनःजन / उत्पत्ति
सृज्रचनासर्गःसृष्टि / रचना
कम्चाहनाकामःकाम / इच्छा

घञ् कृदन्त प्रसिद्ध शब्दावली

संस्कृत साहित्य (विशेषतः गीता) में घञ् कृदन्त बहुत प्रचलित हैं:

शब्दधातुप्रयोग
त्यागःत्यज्”त्यागः शान्तिरनन्तरम्” (गीता 12.12)
योगःयुज्”योगः कर्मसु कौशलम्” (गीता 2.50)
रागःरञ्ज्”रागद्वेषवियुक्तैः” (गीता 2.64)
क्रोधःक्रुध्”क्रोधाद्भवति सम्मोहः” (गीता 2.63)
मोहःमुह्”सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः” (गीता 2.63)
लोभःलुभ्”क्रोधो लोभस्तथालस्यम्”

ये संज्ञा हैं, विशेषण नहीं

घञ्/अप् कृदन्त संज्ञा (noun) हैं — विभक्ति, वचन बदलता है:

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमात्यागःत्यागौत्यागाः
द्वितीयात्यागम्त्यागौत्यागान्
तृतीयात्यागेनत्यागाभ्याम्त्यागैः

ये अ-कारान्त पुल्लिंग (रामवत्) की तरह decline होते हैं।

वाक्यों में प्रयोग

त्यागः मोक्षस्य मार्गः। त्याग मोक्ष का मार्ग है।

योगः चित्तवृत्तिनिरोधः। (पतञ्जलि) योग = चित्त की वृत्तियों का निरोध।

क्रोधात् भवति सम्मोहः। (गीता 2.63) क्रोध से सम्मोह (मोह) उत्पन्न होता है।

रागद्वेषौ मनसः विकाराः। राग और द्वेष मन के विकार हैं।

कृत् और तद्धित — पुनः तुलना

विषयकृत् (कृदन्त)तद्धित (तद्धितान्त)
आधारधातुसंज्ञा/विशेषण
उदाहरणत्यज् → त्यागःधन → धनवान्
कार्यक्रिया से संज्ञा/विशेषणसंज्ञा से नई संज्ञा/विशेषण

अगले पाठों में तद्धित प्रत्यय विस्तार से पढ़ेंगे।

याद रखें

  1. घञ् = धातु → भाववाचक संज्ञा (abstract noun)
  2. धातु में वृद्धि होती है (अ→आ, उ→ओ)
  3. परिणाम प्रायः पुल्लिंग (त्यागः, योगः, भोगः)
  4. ये अ-कारान्त पुल्लिंग की तरह decline होते हैं
  5. गीता/साहित्य में अत्यन्त सामान्य — त्यागः, योगः, क्रोधः, मोहः, लोभः

अभ्यास

प्रश्न 1 / 60 सही

घञ् प्रत्यय से किस प्रकार के शब्द बनते हैं?