कर्मवाच्य — कर्म प्रधान
अनुमानित समय: 18 मिनट
कर्मवाच्य क्या है?
कर्मवाच्य (Passive Voice) में कर्म (object) प्रधान होता है। कर्ता गौण (secondary) हो जाता है।
कर्तृवाच्य → कर्मवाच्य तुलना
| कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य | |
|---|---|---|
| कर्ता | प्रथमा | तृतीया |
| कर्म | द्वितीया | प्रथमा |
| क्रिया | कर्ता के अनुसार, परस्मैपद | कर्म के अनुसार, आत्मनेपद |
मूल उदाहरण
कर्तृवाच्य: रामः ग्रन्थं पठति। (राम पुस्तक पढ़ता है।)
कर्मवाच्य: रामेण ग्रन्थः पठ्यते। (राम द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है।)
| पद | कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य |
|---|---|---|
| राम | रामः (प्रथमा) | रामेण (तृतीया) |
| ग्रन्थ | ग्रन्थम् (द्वितीया) | ग्रन्थः (प्रथमा) |
| पठ् | पठति (परस्मैपद) | पठ्यते (आत्मनेपद) |
कर्मवाच्य की क्रिया — कैसे बनाएँ?
सूत्र: धातु + य + आत्मनेपद प्रत्यय
| धातु | कर्मवाच्य | प्रक्रिया |
|---|---|---|
| पठ् (पढ़ना) | पठ्यते | पठ् + य + ते |
| लिख् (लिखना) | लिख्यते | लिख् + य + ते |
| हन् (मारना) | हन्यते | हन् + य + ते |
| दृश् (देखना) | दृश्यते | दृश् + य + ते |
| श्रु (सुनना) | श्रूयते | श्रु + य + ते (ऊ दीर्घ) |
| कृ (करना) | क्रियते | कृ → क्रि + य + ते |
| दा (देना) | दीयते | दा → दी + य + ते |
| ज्ञा (जानना) | ज्ञायते | ज्ञा + य + ते |
कुछ धातुओं में स्वर-परिवर्तन होता है — कृ → क्रि, दा → दी। ये विशेष नियम हैं।
आत्मनेपद प्रत्यय (कर्मवाच्य में)
कर्मवाच्य में सदैव आत्मनेपद प्रत्यय लगते हैं:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | -ते | -एते | -न्ते |
| मध्यम | -से | -एथे | -ध्वे |
| उत्तम | -ए | -वहे | -महे |
उदाहरण — पठ् धातु (कर्मवाच्य, लट् लकार)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पठ्यते | पठ्येते | पठ्यन्ते |
| मध्यम | पठ्यसे | पठ्येथे | पठ्यध्वे |
| उत्तम | पठ्ये | पठ्यावहे | पठ्यामहे |
क्रिया कर्म के अनुसार बदलती है
कर्मवाच्य में क्रिया कर्म (जो अब प्रथमा में है) के वचन के अनुसार बदलती है:
| वाक्य | विश्लेषण |
|---|---|
| रामेण ग्रन्थः पठ्यते | ग्रन्थः (एकवचन) → पठ्यते (एकवचन) |
| रामेण ग्रन्थौ पठ्येते | ग्रन्थौ (द्विवचन) → पठ्येते (द्विवचन) |
| रामेण ग्रन्थाः पठ्यन्ते | ग्रन्थाः (बहुवचन) → पठ्यन्ते (बहुवचन) |
अधिक उदाहरण
| कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य | अनुवाद (कर्मवाच्य) |
|---|---|---|
| माता अन्नं पचति | मात्रा अन्नं पच्यते | माता द्वारा अन्न पकाया जाता है |
| शिष्यः श्लोकं स्मरति | शिष्येण श्लोकः स्मर्यते | शिष्य द्वारा श्लोक स्मरण किया जाता है |
| जनाः कथां शृण्वन्ति | जनैः कथा श्रूयते | लोगों द्वारा कथा सुनी जाती है |
कर्मवाच्य कब प्रयुक्त होता है?
संस्कृत में कर्मवाच्य का प्रयोग बहुत सामान्य है — हिन्दी या अंग्रेज़ी से कहीं अधिक:
- जब कर्ता अज्ञात हो — कथ्यते (कहा जाता है), श्रूयते (सुना जाता है)
- शास्त्रीय शैली में — अत्र प्रश्नः क्रियते (यहाँ प्रश्न किया जाता है)
- कर्म पर बल देने के लिए — वेदाः अध्यीयन्ते (वेद पढ़े जाते हैं)
याद रखें
- कर्मवाच्य = Passive Voice — कर्म प्रधान
- कर्ता → तृतीया, कर्म → प्रथमा
- क्रिया = धातु + य + आत्मनेपद (कर्म के वचन के अनुसार)
- संस्कृत में कर्मवाच्य अत्यन्त प्रचलित है
- कुछ धातुओं में स्वर-परिवर्तन होता है (कृ → क्रि, दा → दी)
अभ्यास
प्रश्न 1 / 70 सही
कर्मवाच्य में कर्ता किस विभक्ति में होता है?