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इस मॉड्यूल के पाठ

यङन्त — Frequentative

अनुमानित समय: 15 मिनट

यङन्त धातु — पुनरावृत्ति/तीव्रता (Frequentative/Intensive)

यङ् प्रत्यय धातु में बार-बार करना (repetition) या तीव्रता से करना (intensity) का अर्थ जोड़ता है। यङ् प्रत्यय से बनी धातु को यङन्त कहते हैं।

पठ् (पढ़ना) → पापठ्यते (बार-बार पढ़ता है) भू (होना) → बोभूयते (बार-बार होता है)

यङन्त कैसे बनता है?

सूत्र: विशेष द्वित्व + धातु + य (यङ्) + आत्मनेपद प्रत्यय

चरणप्रक्रियापठ् का उदाहरण
1मूल धातुपठ्
2यङ् प्रत्ययपठ् + य
3विशेष द्वित्वपा + पठ्य
4आत्मनेपद प्रत्ययपापठ्य + ते
परिणामपापठ्यते

द्वित्व की विशेषताएँ (यङन्त में)

यङन्त का द्वित्व सन्नन्त/लिट् से भिन्न है:

  • स्वर दीर्घ होता है या गुण होता है
  • भू → बोभूय (ऊ→ओ, गुण)
  • पठ् → पापठ्य (अ→आ, दीर्घ)
  • दीप् → देदीप्य (ई→ए, गुण)

प्रमुख यङन्त रूप

मूल धातुअर्थयङन्त (प्र.पु.ए.)अर्थ
भूहोनाबोभूयतेबार-बार होता है
पठ्पढ़नापापठ्यतेबार-बार पढ़ता है
दीप्चमकनादेदीप्यतेतीव्रता से चमकता है
लुप्छिपनालोलुप्यतेबार-बार लालचित होता है
नृत्नाचनानानृत्यतेबार-बार नाचता है
पच्पकानापापच्यतेबार-बार पकाता है

यङ्लुक् — यङ् का लोप

कभी-कभी यङ् प्रत्यय का लोप (लुक्) हो जाता है — केवल विशेष द्वित्व रहता है। ये रूप परस्मैपद में चलते हैं:

मूल धातुयङन्त (आत्मने)यङ्लुक् (परस्मै)
भूबोभूयतेबोभवीति
दीप्देदीप्यतेदेदीपीति
लुप्लोलुप्यतेलोलुपीति

यङ्लुक् अत्यन्त दुर्लभ है — साधारण पठन में प्रायः नहीं मिलता।

हिन्दी में प्रचलित यङन्त शब्द

यङन्तहिन्दी शब्दअर्थ
देदीप्यमानदीप्तिमानतीव्रता से चमकता हुआ
लोलुपलोलुप/लालचीबार-बार लोभ करने वाला

तीन व्युत्पन्न धातु-प्रत्ययों की तुलना

प्रत्ययनामअर्थउदाहरण
सन्सन्नन्तकरना चाहनापिपठिषति (पढ़ना चाहता है)
यङ्यङन्तबार-बार करनापापठ्यते (बार-बार पढ़ता है)
णिच्णिजन्तकरवानापाठयति (पढ़ाता है)

ये तीनों नई धातु बनाते हैं — इन नई धातुओं से सभी लकार, कृदन्त आदि बन सकते हैं।

यङन्त का प्रयोग

यङन्त बहुत दुर्लभ है — वैदिक संस्कृत और कुछ शास्त्रीय ग्रन्थों में ही मिलता है। व्यावहारिक संस्कृत में बार-बार करना दर्शाने के लिए पुनः पुनः (बार-बार) जैसे अव्ययों का प्रयोग होता है।

लेकिन देदीप्यमान जैसे विशेषण और लोलुप जैसे शब्द साहित्य में प्रचलित हैं।

याद रखें

  1. यङ् प्रत्यय = बार-बार करना / तीव्रता (repetition/intensity)
  2. बनावट: विशेष द्वित्व + धातु + य + आत्मनेपद
  3. द्वित्व में स्वर दीर्घ/गुण होता है (पा-पठ्य, बो-भूय, दे-दीप्य)
  4. देदीप्यमान (चमकता हुआ), लोलुप (लालची) — प्रचलित यङन्त शब्द
  5. यङन्त दुर्लभ है — पहचानना आना चाहिए, रूप रटने की आवश्यकता नहीं

अभ्यास

प्रश्न 1 / 60 सही

यङन्त धातु का क्या अर्थ होता है?