लुट् लकार — Second Future
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लुट् लकार — अनद्यतन भविष्यत् (Periphrastic Future)
लुट् लकार संस्कृत का दूसरा भविष्यत् काल (Second Future/Periphrastic Future) है। यह आज के बाद के निश्चित भविष्य को दर्शाता है।
दोनों भविष्यत् लकारों की तुलना
| लकार | नाम | उदाहरण (गम्) | प्रयोग |
|---|---|---|---|
| लृट् | सामान्य भविष्यत् | गमिष्यति | कभी भी भविष्य में |
| लुट् | अनद्यतन भविष्यत् | गन्ता | आज के बाद, निश्चित |
लुट् लकार कैसे बनता है?
लुट् एक परिभाषित (periphrastic) लकार है — दो भागों से बनता है:
धातु + तृ प्रत्यय (agent noun) + अस् धातु (होना) के रूप
चरण:
- धातु + तृ → तृ-प्रत्ययान्त शब्द (agent noun)
- इस शब्द के प्रथमा विभक्ति रूप
-
- अस् (होना) के लट् लकार रूप (प्रथम पुरुष में लुप्त)
गम् धातु — लुट् लकार
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गन्ता | गन्तारौ | गन्तारः |
| मध्यम | गन्तासि | गन्तास्थः | गन्तास्थ |
| उत्तम | गन्तास्मि | गन्तास्वः | गन्तास्मः |
प्रथम पुरुष में ‘अस्’ लुप्त हो जाता है — केवल तृ-प्रत्ययान्त शब्द (गन्ता, गन्तारौ, गन्तारः) रहता है।
मध्यम और उत्तम पुरुष में ‘अस्’ के रूप जुड़ते हैं — -असि, -अस्थः, -अस्मि आदि।
भू धातु — लुट् लकार
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भविता | भवितारौ | भवितारः |
| मध्यम | भवितासि | भवितास्थः | भवितास्थ |
| उत्तम | भवितास्मि | भवितास्वः | भवितास्मः |
सामान्य लुट् रूप
| धातु | तृ-प्रत्ययान्त | लुट् (प्र.पु.ए.) | अर्थ |
|---|---|---|---|
| कृ | कर्तृ | कर्ता | करेगा (निश्चित) |
| गम् | गन्तृ | गन्ता | जाएगा (निश्चित) |
| भू | भवितृ | भविता | होगा (निश्चित) |
| दा | दातृ | दाता | देगा (निश्चित) |
| वच् | वक्तृ | वक्ता | बोलेगा (निश्चित) |
| श्रु | श्रोतृ | श्रोता | सुनेगा (निश्चित) |
ध्यान दें — कर्ता, दाता, वक्ता, श्रोता — ये शब्द हिन्दी में भी प्रचलित हैं! ये मूलतः तृ-प्रत्ययान्त शब्द हैं।
लुट् लकार का प्रयोग
- निश्चित भविष्य — सः श्वः गन्ता (वह कल निश्चित रूप से जाएगा)
- आज के बाद का समय — अनद्यतन (not today) भविष्य
व्यावहारिक रूप से लुट् का प्रयोग दुर्लभ है। अधिकतर लृट् (गमिष्यति) से काम चलता है। लेकिन शास्त्रीय संस्कृत में लुट् मिलता है।
याद रखें
- लुट् = Second Future = अनद्यतन भविष्यत् (निश्चित, आज के बाद)
- बनावट: धातु + तृ + अस् — परिभाषित (periphrastic) संरचना
- प्रथम पुरुष एकवचन: गन्ता, कर्ता, भविता, दाता
- मध्यम/उत्तम में अस् जुड़ता है: गन्तासि, गन्तास्मि
- व्यावहारिक प्रयोग दुर्लभ — लृट् (गमिष्यति) अधिक प्रचलित
अभ्यास
प्रश्न 1 / 60 सही
लुट् लकार किस काल को दर्शाता है?