तुमुन् प्रत्यय — infinitive
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तुमुन् प्रत्यय — Infinitive (करने के लिए)
तुमुन् प्रत्यय से infinitive (क्रियार्थक अव्यय) बनता है — “करने के लिए”, “करना”।
सः पठितुम् इच्छति। वह पढ़ना चाहता है। / वह पढ़ने के लिए इच्छुक है।
निर्माण नियम
धातु + तुम् = तुमुन् कृदन्त
| धातु | तुमुन् रूप | अर्थ |
|---|---|---|
| गम् | गन्तुम् | जाने के लिए |
| कृ | कर्तुम् | करने के लिए |
| पठ् | पठितुम् | पढ़ने के लिए |
| लिख् | लिखितुम् | लिखने के लिए |
| दृश् | द्रष्टुम् | देखने के लिए |
| श्रु | श्रोतुम् | सुनने के लिए |
| भुज् | भोक्तुम् | खाने के लिए |
| पा | पातुम् | पीने के लिए |
| दा | दातुम् | देने के लिए |
| ज्ञा | ज्ञातुम् | जानने के लिए |
| वद् | वक्तुम् | बोलने के लिए |
| जि | जेतुम् | जीतने के लिए |
| नी | नेतुम् | ले जाने के लिए |
ध्यान दें: कुछ धातुओं में ‘इ’ (इट्) जुड़ता है — पठ् → पठितुम्, लिख् → लिखितुम्। कुछ में नहीं — कृ → कर्तुम्, गम् → गन्तुम्।
तुमुन् = अव्यय
तुमुन् कृदन्त अव्यय है — इसमें लिंग, वचन, विभक्ति कुछ नहीं बदलता:
| वाक्य | तुमुन् रूप |
|---|---|
| रामः गन्तुम् इच्छति | गन्तुम् (पुल्लिंग) |
| सीता गन्तुम् इच्छति | गन्तुम् (स्त्रीलिंग) |
| ते गन्तुम् इच्छन्ति | गन्तुम् (बहुवचन) |
सदा ‘गन्तुम्’ ही — कोई परिवर्तन नहीं।
सहायक क्रियाएँ
तुमुन् प्रायः इन क्रियाओं के साथ प्रयुक्त होता है:
| क्रिया | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| इच्छति | चाहना | पठितुम् इच्छति (पढ़ना चाहता है) |
| शक्नोति | सकना | गन्तुम् शक्नोति (जा सकता है) |
| अर्हति | योग्य होना | कर्तुम् अर्हति (करने योग्य है) |
| यतते | प्रयत्न करना | जेतुम् यतते (जीतने का प्रयत्न करता है) |
| आरभते | आरम्भ करना | पठितुम् आरभते (पढ़ना आरम्भ करता है) |
| समर्थः | समर्थ | कर्तुम् समर्थः (करने में समर्थ) |
| उचितम् | उचित | वक्तुम् उचितम् (बोलना उचित है) |
वाक्यों में प्रयोग
बालकः क्रीडितुम् इच्छति। बालक खेलना चाहता है।
सः संस्कृतं पठितुम् शक्नोति। वह संस्कृत पढ़ सकता है।
त्वं सत्यं वक्तुम् अर्हसि। तुम सत्य बोलने योग्य हो।
अहं ग्रन्थं लिखितुम् यते। मैं ग्रन्थ लिखने का प्रयत्न करता हूँ।
गन्तुम् न शक्नोमि — रोगः अस्ति। जा नहीं सकता — रोग है।
गीता से उदाहरण
न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्। (3.5) कोई भी क्षणभर भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता।
योगी भवितुम् अर्हति। (6.46) (वह) योगी होने योग्य है। (भवितुम् = भू + तुमुन्)
याद रखें
- तुमुन् = ”…ने के लिए” / infinitive — अव्यय
- रूप: धातु + तुम् (कभी इट् सहित — पठितुम्)
- प्रायः इच्छति, शक्नोति, अर्हति आदि के साथ प्रयुक्त
- अव्यय — लिंग/वचन/विभक्ति नहीं बदलती
- हिन्दी के ”…ना/…ने को” के समकक्ष
अभ्यास
तुमुन् प्रत्यय का अर्थ क्या है?