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इस मॉड्यूल के पाठ

'इति' वाक्य — उद्धरण

अनुमानित समय: 15 मिनट

‘इति’ — संस्कृत का उद्धरण चिह्न

इति संस्कृत का सबसे महत्त्वपूर्ण अव्यय (indeclinable) है। यह उद्धरण (quote), नामकरण, विचार और कारण दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है।

मूल नियम

‘इति’ सदैव उद्धरण/कथन के बाद आता है — अंग्रेज़ी के closing quotation marks (”) जैसा।

1. उद्धरण — प्रत्यक्ष कथन (Direct Speech)

संस्कृत में inverted commas (”…”) का प्रयोग मूलतः नहीं होता। उनकी जगह ‘इति’ प्रयुक्त होता है:

“अहं गच्छामि” इति सः अवदत्।

पदअर्थ
अहं गच्छामि”मैं जाता हूँ” — उद्धरण
इतिऐसा (quotation marker)
सःउसने
अवदत्कहा

अनुवाद: “मैं जाता हूँ” — ऐसा उसने कहा।

अधिक उदाहरण

वाक्यअनुवाद
”गच्छ” इति राजा अवदत्”जाओ” — राजा ने कहा
”अहं धन्यः अस्मि” इति ब्राह्मणः अभाषत”मैं धन्य हूँ” — ब्राह्मण ने कहा
”किं नाम ते?” इति मुनिः अपृच्छत्”तुम्हारा नाम क्या है?” — मुनि ने पूछा

2. विचार — मानसिक कथन

‘इति’ + चिन्तयति/मन्यते = मन में सोचता है:

“किं करोमि” इति सः चिन्तयति।

अनुवाद: “क्या करूँ” — ऐसा वह सोचता है।

वाक्यअनुवाद
”अयं मार्गः सुन्दरः” इति सा अमन्यत”यह मार्ग सुन्दर है” — ऐसा उसने सोचा
”कः अत्र?” इति बालकः अचिन्तयत्”कौन यहाँ?” — बालक ने सोचा

3. नामकरण — नाम बताना

“रामः” इति तस्य नाम।

अनुवाद: उसका नाम “राम” है।

वाक्यअनुवाद
”हितोपदेशः” इति ग्रन्थः”हितोपदेश” नामक ग्रन्थ
”अयोध्या” इति नगरी”अयोध्या” नामक नगरी
”भगवद्गीता” इति उपनिषद्”भगवद्गीता” नामक उपनिषद्

4. कारण/मत दर्शाना

“सत्यं वद” इति शास्त्रम्।

अनुवाद: “सत्य बोलो” — ऐसा शास्त्र (कहता है)।

वाक्यअनुवाद
”सर्वं क्षणिकम्” इति बौद्धाः मन्यन्ते”सब क्षणिक है” — बौद्ध मानते हैं
”आत्मा नित्यः” इति वेदान्तः”आत्मा नित्य है” — वेदान्त (कहता है)

वाक्य-संरचना

‘इति’ वाक्य की सामान्य संरचना:

[उद्धृत वाक्य] + इति + [वक्ता/कर्ता] + [कथन-क्रिया]

कथन-क्रिया के उदाहरण:

  • अवदत् / उवाच (कहा)
  • अभाषत (बोला)
  • अपृच्छत् (पूछा)
  • अचिन्तयत् (सोचा)
  • मन्यते (मानता है)
  • श्रूयते (सुना जाता है)

‘इति’ और सन्धि

‘इति’ के पूर्व प्रायः सन्धि होती है:

मूलसन्धिनियम
भवति इतिभवतीतिइ+इ = ई
गच्छतु इतिगच्छत्वितिउ+इ = वि (यण् सन्धि)
रामः इतिराम इतिविसर्ग सन्धि

याद रखें

  1. इति = संस्कृत का quotation marker — कथन/उद्धरण के बाद आता है
  2. चार प्रमुख प्रयोग: उद्धरण, विचार, नामकरण, कारण/मत
  3. वाक्य-क्रम: [उद्धरण] + इति + [वक्ता] + [क्रिया]
  4. संस्कृत पठन में ‘इति’ पहचानना अत्यावश्यक — लगभग हर ग्रन्थ में मिलता है
  5. ‘इति’ अव्यय है — इसका कोई रूप-परिवर्तन नहीं होता

अभ्यास

प्रश्न 1 / 60 सही

'इति' का संस्कृत वाक्य में क्या कार्य है?