सुभाषित सरल
विद्या ददाति विनयम् — ज्ञान की श्रृंखला
मूल पाठ
विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥
यह प्रसिद्ध सुभाषित एक कार्य-कारण श्रृंखला (chain of causation) प्रस्तुत करता है: विद्या → विनय → पात्रता → धन → धर्म → सुख। प्रत्येक चरण अगले का कारण बनता है।
व्याकरण विशेष
- विनयात् — विनय शब्द, पञ्चमी विभक्ति एकवचन (= से)। यहाँ ‘कारण’ के अर्थ में।
- पात्रत्वात् — पात्रत्व शब्द, पञ्चमी विभक्ति (= से)
- धनात् — धन शब्द, पञ्चमी विभक्ति (= से)
- ददाति — दा धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन (= देती है)
- आप्नोति — आप् धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन (= प्राप्त करता है)
सन्धि अभ्यास
इस श्लोक में कई सन्धियाँ हैं:
| सन्धि रूप | विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| विनयाद्याति | विनयात् + याति | त् + य = द् + य (जश्त्व) |
| पात्रत्वाद्धनम् | पात्रत्वात् + धनम् | त् + ध = द् + ध (जश्त्व) |
| धनाद्धर्मम् | धनात् + धर्मम् | त् + ध = द् + ध (जश्त्व) |
ध्यान दें — तीनों सन्धियों में जश्त्व नियम लागू है: पञ्चमी विभक्ति के -त् के बाद घोष व्यञ्जन आने पर त् → द् हो जाता है।