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सुभाषित सरल

मित्रं आपद्गतं — सच्चा मित्र

मूल पाठ

आपदि मित्रपरीक्षा शूरपरीक्षा रणाङ्गणे भवति।
विनये वंशपरीक्षा शीलपरीक्षा धनक्षये भवति॥

यह सुभाषित चार प्रकार की परीक्षाओं का वर्णन करता है — मित्र, वीर, वंश और चरित्र की। प्रत्येक की परीक्षा एक विशेष परिस्थिति में होती है। सच्चा मित्र वही है जो कठिन समय में साथ दे। सच्चा वीर वही जो युद्धभूमि में अपनी वीरता दिखाए।

यह श्लोक आर्या छन्द में है, जो सुभाषितों में बहुत प्रचलित छन्द है।

व्याकरण विशेष

  • आपदि — आपद् शब्द (स्त्रीलिङ्ग, दकारान्त), सप्तमी एकवचन (= विपत्ति में)
  • मित्रपरीक्षा — मित्र + परीक्षा, षष्ठी तत्पुरुष समास (= मित्र की परीक्षा)
  • रणाङ्गणे — रण + अङ्गण = रणाङ्गण (दीर्घ सन्धि), सप्तमी एकवचन (= रणभूमि में)
  • विनये — विनय शब्द, सप्तमी एकवचन (= विनय/शिष्टाचार में)
  • धनक्षये — धन + क्षय, षष्ठी तत्पुरुष समास (= धन का क्षय), सप्तमी एकवचन
  • शीलपरीक्षा — शील + परीक्षा, षष्ठी तत्पुरुष (= चरित्र की परीक्षा)
  • इस श्लोक में चार सप्तमी विभक्ति के प्रयोग हैं — आपदि, रणाङ्गणे, विनये, धनक्षये — सब “कब/किस स्थिति में” अर्थ देते हैं