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प्रत्याहार — वर्ण-समूह संकेत

Pratyahara System — Phoneme Group Notation

प्रत्याहार क्या है?

प्रत्याहार पाणिनि व्याकरण की एक अद्भुत विशेषता है। यह वर्ण-समूहों को संक्षेप में लिखने की एक विधि है — एक प्रकार का शॉर्टहैण्ड (shorthand notation)। जहाँ बार-बार अनेक वर्णों का नाम लेना पड़ता, वहाँ पाणिनि केवल दो वर्णों में पूरे समूह का निर्देश कर देते हैं।

प्रत्याहार माहेश्वर सूत्रों पर आधारित हैं। बिना माहेश्वर सूत्रों को जाने प्रत्याहारों को समझना सम्भव नहीं है।

प्रत्याहार बनाने का नियम

पाणिनि का सूत्र है — “आदिरन्त्येन सहेता” (1.1.71)

अर्थ: “आदि वर्ण अन्त्य इत् वर्ण के साथ मिलकर प्रत्याहार बनाता है।“

विधि

  1. माहेश्वर सूत्रों में किसी भी वर्ण को चुनें — यह प्रत्याहार का आदि (प्रथम) वर्ण होगा।
  2. उसके बाद आने वाले किसी भी सूत्र के इत् (अनुबन्ध) वर्ण को चुनें — यह प्रत्याहार का अन्त्य होगा।
  3. आदि वर्ण से लेकर अन्त्य इत् वर्ण तक — बीच में आने वाले सभी वर्ण (इत् वर्णों को छोड़कर) उस प्रत्याहार में सम्मिलित होंगे।

सरल सूत्र: प्रथम वर्ण + अन्तिम इत् = बीच के सभी वर्णों का समूह

प्रमुख प्रत्याहार — विस्तृत व्युत्पत्ति

1. अच् — सभी स्वर

आदि: अ (सूत्र 1 का प्रथम वर्ण) अन्त्य इत्: च् (सूत्र 4 का इत् वर्ण)

व्युत्पत्ति:

  • सूत्र 1: अ इ उ ण् → अ, इ, उ
  • सूत्र 2: ऋ ऌ क् → ऋ, ऌ
  • सूत्र 3: ए ओ ङ् → ए, ओ
  • सूत्र 4: ऐ औ च् → ऐ, औ (च् इत् है, अतः यहाँ रुकते हैं)

अच् = अ, इ, उ, ऋ, ऌ, ए, ओ, ऐ, औ — सभी 9 स्वर

(ध्यान दें — दीर्घ रूप आ, ई, ऊ, ॠ सवर्ण नियम से स्वतः सम्मिलित हैं।)

2. हल् — सभी व्यञ्जन

आदि: ह (सूत्र 5 का प्रथम वर्ण) अन्त्य इत्: ल् (सूत्र 14 का इत् वर्ण)

व्युत्पत्ति:

  • सूत्र 5 से 14 तक के सभी वर्ण (इत् वर्णों को छोड़कर)
  • ह, य, व, र, ल, ञ, म, ङ, ण, न, झ, भ, घ, ढ, ध, ज, ब, ग, ड, द, ख, फ, छ, ठ, थ, च, ट, त, क, प, श, ष, स, ह

हल् = सभी व्यञ्जन

3. अल् — सभी वर्ण

आदि: अ (सूत्र 1) अन्त्य इत्: ल् (सूत्र 14)

अल् = अच् + हल् = सभी स्वर + सभी व्यञ्जन = सम्पूर्ण वर्णमाला

4. यण् — अन्तःस्थ व्यञ्जन (Semivowels)

आदि: य (सूत्र 5) अन्त्य इत्: ण् (सूत्र 6 का इत्)

व्युत्पत्ति:

  • सूत्र 5: ह य व र ट् → य, व, र (ह को छोड़ते हैं क्योंकि य आदि है)
  • सूत्र 6: ण् → ल

यण् = य, व, र, ल — चारों अन्तःस्थ वर्ण

5. अण् — मूल ह्रस्व स्वर (अ, इ, उ)

आदि: अ (सूत्र 1) अन्त्य इत्: ण् (सूत्र 1 का इत्)

अण् = अ, इ, उ

यह सूत्र 1 के भीतर ही पूर्ण हो जाता है।

6. अक् — सभी सरल स्वर

आदि: अ (सूत्र 1) अन्त्य इत्: क् (सूत्र 2 का इत्)

व्युत्पत्ति:

  • सूत्र 1: अ इ उ ण् → अ, इ, उ
  • सूत्र 2: ऋ ऌ क् → ऋ, ऌ

अक् = अ, इ, उ, ऋ, ऌ — सभी 5 मूल (सरल) स्वर

7. इक् — इ से ऌ तक

आदि: इ (सूत्र 1) अन्त्य इत्: क् (सूत्र 2 का इत्)

व्युत्पत्ति:

  • सूत्र 1: अ इ उ ण् → इ, उ
  • सूत्र 2: ऋ ऌ क् → ऋ, ऌ

इक् = इ, उ, ऋ, ऌ

8. एच् — संयुक्त स्वर

आदि: ए (सूत्र 3) अन्त्य इत्: च् (सूत्र 4 का इत्)

एच् = ए, ओ, ऐ, औ — सभी संयुक्त स्वर

प्रमुख प्रत्याहार सारणी

प्रत्याहारआदिअन्त्य इत्विस्तारअर्थ
अच्च्अ इ उ ऋ ऌ ए ओ ऐ औसभी स्वर
हल्ल्ह य व र… श ष स हसभी व्यञ्जन
अल्ल्सभी वर्णसम्पूर्ण वर्णमाला
अण्ण्अ इ उतीन मूल स्वर
अक्क्अ इ उ ऋ ऌसभी सरल स्वर
इक्क्इ उ ऋ ऌअ-रहित सरल स्वर
यण्ण्य व र लअन्तःस्थ वर्ण
एच्च्ए ओ ऐ औसंयुक्त स्वर
एङ्ङ्ए ओगुण स्वर
ऐच्च्ऐ औवृद्धि स्वर
यम्म्य व र ल ञ म ङ ण नअन्तःस्थ + अनुनासिक
यञ्ञ्य व र ल ञ म ङ ण न झ भयम् + झ, भ
यर्र्य व र… श ष सअन्तःस्थ से ऊष्म तक
झष्ष्झ भ घ ढ धसभी महाप्राण घोष
जश्श्ज ब ग ड दसभी अल्पप्राण घोष
खर्र्ख फ छ ठ थ च ट त क प श ष ससभी अघोष वर्ण
शर्र्श ष सऊष्म वर्ण

व्याकरण में प्रत्याहारों का प्रयोग

प्रत्याहार पाणिनि के सूत्रों को अत्यन्त संक्षिप्त बनाते हैं। कुछ उदाहरण:

उदाहरण 1: इको यणचि (6.1.77)

  • इक् = इ, उ, ऋ, ऌ
  • यण् = य, व, र, ल
  • अच् = सभी स्वर

अर्थ: “इक् वर्ण (इ/उ/ऋ/ऌ) के बाद जब अच् (कोई स्वर) आए, तो इक् वर्ण का यण् (क्रमशः य/व/र/ल) हो जाता है।”

उदाहरण: इ + अत्र = यत्र, मधु + अरि = मध्वरि

उदाहरण 2: अचो ञ्णिति (7.2.115)

  • अच् = सभी स्वर

अर्थ: “अच् (स्वर) के स्थान पर वृद्धि होती है जब ञित् या णित् प्रत्यय परे हो।“

उदाहरण 3: खरि च (8.4.55)

  • खर् = सभी अघोष वर्ण (ख, फ, छ, ठ, थ, च, ट, त, क, प, श, ष, स)

अर्थ: “खर् वर्ण परे होने पर (पूर्व पद का अन्तिम वर्ण चर् हो जाता है)।“

प्रत्याहार प्रणाली की विशेषताएँ

  1. संक्षिप्तता: दो अक्षरों में पूरे वर्ण-समूह का निर्देश। “सभी स्वर” कहने के बदले केवल “अच्”।
  2. सुनिश्चितता: प्रत्येक प्रत्याहार का अर्थ एकदम स्पष्ट है — कोई अस्पष्टता नहीं।
  3. लचीलापन: विभिन्न इत् वर्णों को चुनकर विभिन्न आकार के समूह बनाए जा सकते हैं।
  4. गणितीय पूर्णता: 14 सूत्रों से कुल 281 सम्भावित प्रत्याहार बनाए जा सकते हैं, जिनमें से पाणिनि लगभग 42 प्रत्याहारों का प्रयोग करते हैं।

सारांश

  • प्रत्याहार = आदि वर्ण + अन्त्य इत् वर्ण = बीच के सभी वर्णों का समूह।
  • “आदिरन्त्येन सहेता” — यह प्रत्याहार का मूल नियम है।
  • अच् = सभी स्वर, हल् = सभी व्यञ्जन — ये दो सबसे महत्त्वपूर्ण प्रत्याहार हैं।
  • प्रत्याहार पाणिनि की व्याकरण-प्रणाली को अत्यन्त संक्षिप्त और सटीक बनाते हैं।
  • यह प्रणाली विश्व की प्राचीनतम ज्ञात “encoding” पद्धतियों में से एक है।